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10 रुपये से शुरू होकर 400 करोड़ का साम्राज्य खड़ा करने वाले बिहार के एक लड़के की कहानी

जीवन में व्यक्ति का असफलता और डर से सामना उसके अपने मस्तिष्क की बनावट और सोच के अनुसार ही होता है। इस कहानी का विषय थोड़ा आम से हट कर हो सकता है पर उनकी उपलब्धियां निश्चित रूप से कहीं ऊँची और बेहद खास है। आइडीन वेंचर के फाउंडर अश्विन श्रीवास्तव यूँ तो आज एक दिव्यांग व्यक्ति हैं परन्तु उन्हें न तो किस्मत से कभी शिकायत रही और न ही कभी अपने सितारों को उन्होंने कोसा। उन्होंने अपनी ताकत को दोबारा समेट कर फिर से अपने आप को एक ऊँचे मुुकाम तक पहुंचाया। इनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है।

अश्विन का जन्म बिहार के एक छोटे से शहर बेतिया में हुआ। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा झारखण्ड के एक शहर साहिबगंज से पूरा किया। उसके बाद वे दिल्ली चले गए और बाद में आईआईटी मुंबई से अपनी शिक्षा पूरी की।

कॉलेज के पहले साल से ही उन्होंने अपना काम शुरू किया और पैसे अर्जित करने की कोशिश की। यह अपनी सुविधाओं के लिए नहीं करते थे बल्कि यह उनकी जरूरत थी। शुरूआत में बिज़नेस की रुप-रेखा बनाना बेहद कठिन था क्योंकि उन्होंने किसी और से यह नहीं सीखा। परन्तु कुछ असफलताओं के बाद सब कुछ आसान हो गया और यहीं से उन्होंने बिज़नेस की बारीक़ियां सीखीं।

अश्विन जब कठिन दौर से गुजर रहे थे, उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं खोई। हर बार विपरीत वक़्त उन्हें पीछे खींचने के बजाय थोड़ा और आगे बढ़ा देता था। कुछ साल पहले उनका एक भयानक ट्रेन एक्सीडेंट हो गया। न केवल वे अपंग हो गए बल्कि मरने के कगार पर पहुंच गए थे। कुछ महीने उन्हें बिस्तर पर ही बिताना पड़ा।

केनफ़ोलिओज़ से खास बातचीत के दौरान अश्विन ने बताया कि “ऐसा कुछ घटित हो जाने पर हम उसे दो तरह से ले सकते हैं। एक तो यह कि आप अपने आप को एक सीमित क्षमता वाले व्यक्ति के रूप में देखने लगते हैं जिसके लिए किसी तरह से ज़िन्दगी को काट लेना ही बड़ी बात है। दूसरा नज़रिया यह हो सकता है कि आप समझते हैं कि आप पर ऊपर वाले की कृपा बरसी है, तभी आप को ज़िन्दगी जीने का दूसरा मौक़ा मिला है और इस दूसरी ज़िन्दगी को कुछ खास बनाना है।”

महीनों बिस्तर पर पड़े-पड़े उन्होंने यह महसूस किया कि उन्हें यह नई वाली ज़िन्दगी एक बड़े उद्देश्य के लिए मिली है। उन्हें यह भी पता था कि वे अभी के मुकाबले और भी उपलब्धियां हासिल करेंगे। यह अवस्था या तो आपको हमेशा के लिए नष्ट कर सकती है या फिर आपको अटूट बना देती है, जैसा की अश्विन के साथ हुआ।

इस दौर में भी अश्विन ने अपना बिज़नेस नहीं छोड़ा। आत्मविश्वास उनके साहस के लिए महत्वपूर्ण था। अगर आप अपने पर भरोसा करते हैं और आपको पता है कि आपको सफलता मिलेगी चाहे कैसी भी स्थिति हो, आगे बढ़ते रहें। इस पृथ्वी के प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ अद्भुत है और अगर आपने अपने इस अद्भुत चीज को साध लिया तो आपको अपने आप में बेहद आत्मविश्वास और साहस मिलेगा।

अश्विन के केस में प्रेरणा उन्हें अपने अंदर से ही मिलती है। वे हमेशा अपने बीते समय से और आसपास के लोगों से प्रेरणा लेते हैं। जब अश्विन ने शुरुआत की तब उन्होंने 10 रुपये को 5000 रुपये में तब्दील किया और यहीं से बिना किसी बाहरी निवेश के उनकी इस पारी की शुरूआत हुई। अभी वे आइडीन वेंचर्स के इन्वेस्टर हैं। इनके इन्वेस्टमेंट के फण्ड का स्रोत उनके LPs (लिमिटेड पार्टनर) जो HNIs (हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल) और अल्ट्रा HNIs होते हैं, से है।

आइडीन वेंचर्स एक प्राइवेट इक्विटी फर्म है जो विश्व के लगभग सभी देशों में फैला हुआ है। इनकी कुल कर्मचारी संख्या सैकड़ों में है। भारत में उनके वेंचर कैपिटल फर्म में 12 लोग हैं। आइडीन की स्वामित्व और प्रबंधन वाली परिसम्पत्तियों के अनुसार किये गए मूल्यांकन के हिसाब से उनकी कीमत 60 मिलियन डॉलर अर्थात 400 करोड़ रुपये की है। 2020-21 तक उनकी 1,000 करोड़ तक पहुँचने के लक्ष्य को देखते हुए यह सहज ही लगता है। उनका प्रसार हेल्थ केयर , रियल एस्टेट, शिक्षा, ई -कॉमर्स और मीडिया तक है। इतना ही नहीं अश्विन अमेरिका के प्राइम-टाइम टीवी शो स्टार्ट-अप सिनरजी विथ श्रीधर के ज़रिये विश्व भर के दर्शकों तक पहुँच रखने वाले शो में भी भागीदार बन गए हैं।

“सफलता ही खुशी और संतोष है। एक व्यक्ति अपने इस एक जीवन में ख़ुशी और सफलता का पीछा करता है। मैं अपने दिए इंटरव्यूज में अपनी व्यक्तिगत बातें नहीं करता। मैं हमेशा अपनी कंपनी की सफलता के बारे में जानकारी देता हूँ लेकिन यहाँ मैं अपनी आत्मा की बातें खोल रहा हूँ। इसका कारण यह है कि मैं पाठकों को यह समझाना चाहता हूँ कि वे सफल होने के लिए पैसे और प्रसिद्धि के पीछे न भागें। वे खुशी के पीछे जाएँ। मैंने देखा है कि बहुत से बिज़नेस मैन चमक-दमक की दुनिया में खो जाते हैं और कुछ ही दिनों में उनका बिज़नेस ठंडा पड़ जाता है। सफलता उन्हें ही मिलेगी जो इस चमक-दमक को भूलकर आगे बढ़ेगा।” — अश्विन

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