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पहली असफलता ने मुझे बिज़नेस के कई गूढ़ रहस्य सिखाए, आज मैं चला रहा हूँ 500 करोड़ की कंपनी

असफलता जीवन का हिस्सा है। कई सफल लोग कई मौकों पर जीवन में असफल रहे हैं। लेकिन बिजनेस स्टार्टअप में असफल होना विनाशकारी हो सकता है और उद्यमी के जीवन पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। एक असफल व्यवसाय के दुष्प्रभाव सिर्फ वित्तीय तनाव और आत्मविश्वास की कमी तक ही सीमित नहीं रहती। इसलिए, जब कोई सकारात्मकता और आशा के साथ व्यवसाय शुरू करने का फैसला करता है, तो उन्हें असफलताओं को स्वीकार करने और अपने व्यवसाय मॉडल में आवश्यक बदलाव करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। एक करियर विकल्प के रूप में स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखने की योजना बनाने वाले सभी लोगों के लिए हमारी आज की कहानी काफी कुछ सीखा जाएगी।

एसके सुंदररमन, जिन्हें आमतौर पर राम के नाम से जाना जाता है, बचपन से ही एक उद्यमी बनने का ख़्वाब रखते थे। वह एक उत्कृष्ट छात्र थे, जिनके सामने ग्रेजुएशन करने के बाद नौकरी के अनेकों विकल्प थे, लेकिन उन्होंने एमबीए करने का फैसला किया। उनका मानना था कि एमबीए उनकी उद्यमशीलता की यात्रा को प्रेरित कर सकता है। यह वर्ष 2000 था – इंटरनेट व्यापार की दुनिया में सबसे अधिक चर्चा की जाने वाली शब्दावली थी।

इंटरनेट द्वारा संचार प्रौद्योगिकी की दुनिया में आई क्रांति कई नए स्टार्टअप्स को जन्म दे रही थी। राम ने भी इंटरनेट स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने आईटी प्रोफेशनल्स के लिए एक ऑनलाइन नेटवर्किंग कंपनी बन्नारी इन्फोटेक लॉन्च की। भारी धनराशि के निवेश और अपार मेहनत के बावजूद, स्टार्टअप एक मजबूत रेवेन्यू मॉडल की कमी के कारण विफल रहा। डॉट कॉम बबल कुछ साल पहले ही फट गया था और भारत इंटरनेट आधारित बिजनेस मॉडल के लिए तैयार नहीं था।

केनफ़ोलिओज़ के साथ एक साक्षात्कार में राम ने बताया कि “जिस दिन मुझे एहसास हुआ कि यह बिज़नेस मॉडल काम नहीं कर रहा है तो मुझे काफी निराशा हुई। मैं खुद को टूटा हुआ महसूस कर रहा था, लेकिन सौभाग्य से इस असफलता ने मुझे काफी कुछ सीखा दिया था। मैं एक बार फिर नई मजबूती के साथ एक नया उद्यम शुरू करने का फैसला किया।

वर्ष 2005 में, राम ने नए व्यवसाय में कदम रखा। उन्होंने शिवा टेक्सयर्न्स नाम से एक एकीकृत कपड़ा कंपनी का शुभारंभ किया। उनका लक्ष्य भारत में विशेष कपड़े का अनुसंधान करना और विकसित करना था और विदेश से आयात किए जाने वाले कपड़ों पर अतिरिक्त मूल्य को समाप्त करना था। आज, शिव टेक्सयर्न्स भारत में सबसे सम्मानित कपड़ा निर्माताओं में से एक है। उन्होंने विभिन्न प्रकार के विशेष कपड़ों के लाइनअप की पेशकश करने के लिए वर्षों से शोध किया है। उनके उत्पादों में से एक ड्राई शीट है – टॉडलर्स के नीचे रखी रबर शीट के लिए एक प्रभावी प्रतिस्थापन। शिवा टेक्सयर्न्स भारतीय सशस्त्र बलों के लिए रासायनिक रूप से जैविक सूट के निर्माता भी हैं। ये विशेष सूट भारतीय सैनिकों को रासायनिक विस्फोटों से बचाते हैं। आज शिवा टेक्सयर्न्स उन चुनिंदा कंपनियों में से एक है जो चीन को भी निर्यात करते हैं। आज उनकी कंपनी का वैल्यूएशन 500 करोड़ के पार है।

उन्होंने COVID-19 का मुकाबला करने के लिए तमाम जरुरी उत्पादों को पेश किया है। इस कड़ी में वे बेहद ही किफायती फेस-मास्क और पीपीई किट बनाए। उनके किफायती स्पेशियलिटी मास्क एंटीवायरल ट्रीटमेंट और डबल लेयर्ड शील्ड के साथ सिर्फ 49 रुपये में आते हैं।

राम कहते हैं “नए सेगमेंट के उत्पादों को लांच करने में थोड़ी-बहुत चुनौती तो आई और वह इसकी सफलता को लेकर कहीं न कहीं आश्वस्त भी नहीं थे। हालांकि, जब उन्हें खरीदारों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलनी शुरू हुई, तब उन्हें अपने पुराने फैसले पर प्रसन्नता हुई।

पहले प्रयास में असफल होने के बावजूद, राम ने सीखना जारी रखा और एक बड़ी कंपनी का निर्माण किया – उनका मानना है कि एक योजनाबद्ध व्यवसाय-मॉडल के बारे में दूसरों के विचारों को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अनुसंधान समर्थित व्यवसायों में दृढ़ विश्वास रखने वाले, राम विनिर्माण प्रौद्योगिकियों और उत्पादों में नवाचार को मानते हैं। राम COVID-19 संकट में शांत और रचना की वकालत करते हैं। उनका कहना है कि असफल स्टार्टअप ने उन्हें एमबीए से ज्यादा शिक्षित किया। पहले असफलता ने उन्हें एक उद्यमी के जीवनचक्र में कठिन समय के महत्व का एहसास कराया। कठिनाइयों के बारे में पूछे जाने पर, वह मुस्कुराते हुए कहते हैं, “यह भी बीत जाएगा।”

उनकी कहानी से हमें काफी कुछ सीखने को मिलता है, पहली बात यह कि असफल होने पर व्यक्ति को कभी निराश नहीं होना चाहिए। असफलता की कारणों पर मंथन कर उससे सीख लेना चाहिए। यदि दृढ़ संकल्पित होकर लक्ष्य का पीछा किया जाए तो सफलता अवश्य मिलेगी।

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