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“खाने और कमाने” के अनूठे आइडिया ने इस व्यक्ति को बना दिया एक सफल ब्लॉगर

ऐसे कुछ ही लोग हैं इस दुनिया में जो सामान्य जीवनशैली के बजाय अपने सपनों के साथ आगे बढ़ने पर विचार करते हैं। अपने जुनून के साथ आगे बढ़ना कई बार बेहद कठिन हो जाता है, लेकिन जो अस्थायी बाधाओं पर काबू पा लेता है, उसे सफलता और आंतरिक शांति स्थायी रूप से मिल जाती है। कहते हैं कि आप जब पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से लक्ष्य का पीछा करते हो तो सफलता अवश्य हासिल होती है। एक मार्केट रिसर्चर से प्रसिद्ध खाद्य शोधकर्ता बनने तक का सफ़र तय करने वाले कल्याण कर्माकर ने इस वाक्यांश की सत्यता को साबित किया है।

वाणिज्य प्रशासन में स्नातकोत्तर (एमबीए) की डिग्री के साथ कल्याण ने अपने करियर की शुरुआत मुंबई में मार्केट रिसर्चर के रूप में वर्ष 1997 में की थी। उन्होंने अपने करियर में कई वर्षों तक एक शोधकर्ता के रूप में काम किया। 2007 में आए करियर संकट के पहले सबकुछ अच्छी तरह चल रहा था।

कल्याण ने साल 2007 में ब्लॉगिंग शुरू की। साल 2012 तक यह सिर्फ एक शौक बना रहा। अपने शौक में ही करियर की संभावनाओं को तलाशते हुए कल्याण ने कॉर्पोरेट दुनिया से बाहर निकल कर फूड ब्लॉगिंग करने का फैसला किया। यह कल्याण के लिए काफी कड़ा निर्णय था, लेकिन, जब आप मानसिक शांति के साथ एक दिन भी नहीं बीता पा रहे हैं तो फिर ऐसे धन का उपयोग ही क्या है?

केनफ़ोलिओज़ के साथ बातचीत में कल्याण ने कहा “ जब आप छोड़ने की योजना बनाते हैं, तो कई सवाल उठते हैं। शुक्र है कि अनिश्चितता के उस दौर में मेरी पत्नी हमेशा एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम के रूप में मेरे साथ खड़ी थी। ”

एक पूर्णकालिक पेशे के रूप में खाद्य ब्लॉगिंग के ऊपर निर्भर होना उन दिनों आसान नहीं था। शुरुआत में उनके सामने कई चुनौतियाँ रही। लेकिन, उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा और जैसे-जैसे महीनों बीतते गए, उनके काम पर ध्यान दिया जाने लगा और उन्हें नए-नए अवसर भी मिलने लगे। आज, ‘Finely Chopped’ (अर्थात बारीक कटा हुआ) हर खाने वाले का डिजिटल गंतव्य है। कल्याण की पुस्तक ‘द ट्रैवलिंग बेली’ भारत के उपनगरों में छिपे हुए खाद्य खजाने की बात करती है और यह भारत की सबसे अधिक प्रशंसित पुस्तकों में से एक है।

कल्याण कहते हैं कि “मुझे लगता है कि धैर्य ही सफलता की कुंजी है। किसी को हार नहीं माननी चाहिए आपको हमेशा लक्ष्य प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्पित होकर कदम आगे बढ़ाने चाहिए। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो 2012 में मैंने जो फैसला लिया था, उसके लिए मैं बहुत आभारी महसूस करता हूं। मैंने सीखा कि जब आप अपने जुनून का पालन करते हैं, तो सफलता आपके कदम अवश्य दस्तक देती है।

अपनी रूचि के अनुरूप कार्य करने से ज्यादा खुशी और किसी चीज में नहीं है। आज कल्याण कर्माकर भारतीय ब्लॉगिंग क्षेत्र के सबसे अग्रणी लोगों में से एक हैं। वह एक आदर्श उदाहरण हैं कि कैसे कोई नौकरी की संतुष्टि के लिए एक अजीब विकल्प का चयन कर सकता है और भव्य सफलता भी हासिल कर सकता है।

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