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कोरोना वारियर्स: जब सैलानियों को होटल से बाहर निकाला जा रहा था, तब इस व्यक्ति ने अपनी जमापूंजी से उन्हें स्वदेश पहुँचाया

देशभर में एक ठहराव सा आ गया जब पहली बार 22 मार्च, 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। तब हमने सोचा था कि यह 21 दिनों तक जारी रहेगा, हालांकि यह कई महीनों तक चलता रहा क्योंकि कोविड के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। इसने विभिन्न तरीकों से राष्ट्र को बाधित किया। जहाँ अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई, वहीं बेरोजगारी भी अब तक सबसे अधिक रही, कई लोगों ने अस्पतालों में प्रवेश की अनुपलब्धता के कारण अपने प्रियजनों को खो दिया।

एक बड़ा प्रभाव विभिन्न देशों के पर्यटकों और प्रवासियों पर पड़ा जो लॉकडाउन के बाद भारत में फंस गए थे। घर से बहुत दूर फंसे होने का एहसास सबसे बुरा होता है, आप सोच भी नहीं सकते कि इस तरह के बुरे समय में घर से दूर होना कितना कष्टदायी होता है। साथ ही, हमारे देश में विदेशी लोगों को कोविड फैलाने का आरोपी मानते हुए उन्हें होटल और गेस्ट हाउस से बाहर किया जा रहा था। विपत्ति की इस घड़ी में सरकार के साथ-साथ कुछ लोगों ने भी इन सैलानियों को सुरक्षित घर भेजने की मुहिम की शुरुआत की। ऐसे ही एक कोरोना वारियर हैं उत्तराखंड के शुभम धर्मात्सु

यह एक हृदय विदारक वक़्त था जब विदेशियों को कुछ लोगों द्वारा जानवरों की तरह व्यवहार किया गया और उनके लिए नफरत लगातार बढ़ रही थी। ” शुभम ने केनफ़ोलिओज़ के साथ बातचीत में बताया।

शुभम अपने मन में उसी विचार के साथ रात को सो नहीं सका। कुछ साहस जुटाने के बाद, उन्होंने आखिरकार प्रवासियों को अपने देश वापस भेजने की बहुत जरूरी पहल की। जाहिर है, यह एक आसान काम नहीं था। शुभम ने इस पहल के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और कुछ ही समय में उन्हें सैकड़ों अनुरोध मिले। हर अनुरोध को स्वीकार करना वास्तविक रूप से कठिन था, इसलिए उन्होंने अपने साथियों से धन इकट्ठा करना शुरू कर दिया और अपनी बचत के पाई-पाई लगा दिए। उन्होंने अपने सपनों का कैमरा खरीदने के लिए सालों से 2 लाख रुपए की बचत की थी, इस मुहिम में सारे पैसे लगा दिए।

आपको बता दें कि शुभम ने हिमालय जैसी उच्च छोटी पर भी चढ़ाई की है और कन्याकुमारी से कश्मीर तक की पैदल यात्रा भी की है। इन यात्राओं पर, उन्होंने कभी होटल बुक नहीं किया। वह हमेशा स्थानीय लोगों से संपर्क में रहे।

शुभम बताते हैं कि “यह मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है कि जिन लोगों से मैं अपनी यात्राओं पर मिला, वे बहुत स्वागत करते थे। इसने मुझे ऐसी अवास्तविक यात्राओं को पूरा करने में सक्षम बनाया।”

यात्रा पर मिले अनजाने लोगों से इतना प्यार और अपनापन ही था जो उनके दिल में विदेशी सैलानियों के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना पैदा की और फिर उन्होंने उन्हें सुरक्षित घर भेजने की मुहिम को सफल बनाया।

शुभम ने सभी विदेशियों को दिल्ली में इकट्ठा होने के लिए कहा क्योंकि ज्यादातर दूतावास दिल्ली में हैं। वहां से, उसने एक यात्रा कार्यक्रम की योजना बनाई और उन्हें घर वापस भेज दिया। विदेशियों के बीच, एक गर्भवती महिला थी जिसका प्रेमी उसे छोड़ गया और उसने अपने परिवार द्वारा अस्वीकार किए जाने के डर से अपने घर लौटने से इनकार कर दिया। शुभम ने लॉकडाउन के बीच बच्चे को जन्म देने में उनकी मदद की।

अब तक, उन्होंने 1500 विदेशियों को सुरक्षित रूप से उनके घरों में भेज दिया है और सभी लोग उनके महान काम करने के लिए उनके आभारी हैं। जो विदेशी अपने देश वापस चले गए, उन्होंने भारत में अपने अनुभव के बारे में मीडिया से बात की। इससे भारत को आतिथ्य के मामले में वैश्विक मंच पर भरपूर सराहना मिली।

लोग आमतौर पर अपने सपनों को एक नेक काम के लिए नहीं छोड़ते, लेकिन शुभम एक ऐसे नायक हैं, जिन्होंने किया और हमें उन पर बहुत गर्व है। “मैं जीवन में बाद में कैमरा खरीद सकता हूं, लेकिन लोगों की मदद करने का मौका वापस नहीं आ सकता है।” ऐसा शुभम मानते हैं। केनफ़ोलिओज़ की टीम ऐसे ज़िंदादिल नायक के कारनामें को सलाम करती है।

यह कहानी हमारी सीरीज कोविड वारियर्स का हिस्सा है। आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स सकते हैं और पोस्ट अच्छी लगी तो शेयर अवश्य करें।

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