in

कभी गुमनामी के अंधेरे में जीवन जीने को थे मजबूर, आज जब निकलते तो पूरा गाँव ठोकता है सलामी

यह एक साधारण व्यक्ति की असाधारण कहानी है। एक गुमनाम नायक की जिसने 11 गांवों को निरक्षरता के अंधेरे से बाहर निकाल शिक्षा के प्रकाश से जगमग किया। इस नायक का नाम भले ही हम नहीं जानते होंगे लेकिन इन्होंने ऐसे मुहिम को सफल बनाया है जिसकी सच में जरूरत थी।

उत्तम टेरोन, एक साधारण और बुद्धिमान व्यक्तित्व हैं जिन्होंने ‘सभी के लिए शिक्षा’ को वास्तविक अर्थ दिया है।

गुवाहाटी के एक साधारण परिवार में जन्मे उत्तम के पिता ट्रेन ड्राइवर थे और माँ एक गृहिणी, जो कभी स्कूल नहीं गई थी। शहर के एक कॉलेज से स्नातक पूरी करने के बाद, उत्तम अपने गांव वापस लौट आए।

शिक्षा का प्रसार उसी व्यक्ति से संभव है जिसके पास इसके लिए जुनून हो। और इसी उद्देश्य के साथ उत्तम ने ट्यूशन देने शुरू कर दिए। इससे उन्हें हर महीने 800 रुपये की कमाई होने लगी। जब कभी भी उन्हें अपने इस अानंदकारी काम से पैसे की कमी महसूस होती तो वे अपने दोस्तों के साथ पास की पहाड़ियों में लकड़ी इकट्ठा करने निकल जाते और उसे पास के बाजार में बेच देते। साल 2001 तक उनका जीवन शांतिपूर्ण था जब एक दिन उन्होंने पहाड़ियों से घिरे एक गांव में एक बच्चे को सुस्त पड़े देखा जिसके चेहरे से आशा और आनंद गायब थे।

उत्तम ने अपने भी गांव के बच्चों में उसी तरह की आशाहीनता को महसूस किया। इनमें से ज्यादातर बच्चें या तो स्कूल जाना बंद कर चुके थे या कभी स्कूल ही नहीं गए थे। फिर क्या था उन्होंने इन बच्चों के लिए कुछ करने का इरादा बनाया। उनके लिए एकमात्र संभव बात थी वह यह कि उन्हें शिक्षित करना। लेकिन इस दौड़ में पैसा उनके लिए सबसे बड़ी बाधा थी।

दो साल का इंतजार करने के बाद, उन्होंने 800 रुपये का निवेश करते हुए एक गोशाले में टीन की छत और बांस की दीवारों के साथ एक कमरे का निर्माण किया। गांव के एक बढ़ई से एक जोड़ी डेस्क और बेंच खरीदी और ‘परिजात अकादमी’ के नाम से उन्होंने सिर्फ चार छात्रों के साथ एक महत्त्वाकांक्षी पहल नींव रखी।

“उस समय, माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अनिच्छुक थे। वे स्वयं अनपढ़ थे और उन्हें स्कूल की शिक्षा का मतलब क्या था, पता नहीं था। उनका सोचना था कि उनके बच्चों के लिए खेतों में उनकी मदद करना बेहतर है। इसलिए मुझे उन्हें शिक्षा का महत्व समझाना पड़ा – शिक्षा ही सही दिशा देता है”

आसान प्रतीत होता यह काम उसके बिल्कुल ही विपरीत था। परीजात अकादमी क्या उपलब्ध कराती है, उत्तम कहते हैं, “वर्तमान में हमारी कक्षाएँ 512 छात्रों 25 शिक्षकों के साथ नर्सरी वर्ग से 10वीं तक है। विषयों जैसे असमिया, हिंदी, अंग्रेज़ी, गणित, सामाजिक अध्ययन, पर्यावरण अध्ययन, विज्ञान, नैतिक शिक्षा, कला, स्वर पाठ और संगीत के साथ ही साथ हम बच्चों को सिलाई, बांस शिल्प, परिधान बनाने, कार्ड बनाने आदि भी सिखाते हैं। हम बच्चों के समग्र विकास के लिए खेल-कूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी व्यवस्था करते हैं।”

परीजात अकादमी एक ऐसा शिक्षा का केंद्र बन गया है, जिसे एक अशिक्षित गांव अपने बच्चों के लिए देख रहा था। परीजात अकादमी का लक्ष्य शिक्षा के माध्यम से बच्चों की अव्यक्त क्षमता को पता लगाना और विकसित करना है। बच्चों में प्यार, दया, करुणा और सार्वभौमिक जिम्मेदारियों के गुणों के विकास में मदद करना है।

नासा के अंतरिक्ष यात्री माइकल फिंनके जैसे आगंतुक जो अमेरिकी वायु सेना के एक कर्नल भी है, उन्हें भी इस अकादमी का एक हिस्सा बनाया गया है। अकादमी द्वारा किए गए कार्य इसे और अधिक लोकप्रिय बना दिया है। और जिसकी वजह से भारत और विदेशों से स्वयंसेवक बच्चों को अलग-अलग तरह की गतिविधियों जैसे फोटोग्राफी, कृषि, स्वास्थ्य, खेल, कला और शिल्प, साहसिक कार्यक्रम, कंप्यूटर, योग, आदि की शिक्षा देने आते हैं। समय-समय पर विभिन्न स्कूलों, संस्थानों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से भी छात्र परीजात अकादमी में भेंट करने आते हैं।

“जब से स्कूल शुरू किया है, यात्रा बहुत कठिन हो गयी है। वंचितों के लिए एक स्कूल चलाना आसान नहीं है, विशेष रूप से क्योंकि फंड जमा करना बहुत कठिन होता। 2003 में जब मैंने स्कूल शुरू किया, मैंने इन बच्चों के लिए पेंसिल, पुराने स्कूल बैग और पुराने पुस्तक आदि ग्रामीणों के घर से इकट्ठा किया, जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी।

परीजात अकादमी सफल खड़ा केवल उनलोग की वजह से है, जो अपने हाथों से इसे बनाया और शिक्षा का प्रसार करने के लिए एक संस्था के रूप में इसे जीवित रखे हैं। उत्तम की एक दृष्टि बच्चों के चेहरे पर खुशी देखने की थी। लेकिन यहाँ जो परिणाम था वह असाधारण है। अपने तरीके से काम करते हुए सभी समस्याओं को पीछे छोड़ते हुए उत्तम ने पमोही और आसपास के गांवों में 95 प्रतिशत साक्षरता दर प्राप्त करने में सफल हुए हैं। उनके अपने गांव में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर शून्य है।

 “परीजात महासागर में सिर्फ एक बूंद है; हम पूरे राज्य में खुद के द्वारा एक परिवर्तन नहीं ला सकते। हमारा ध्यान वर्तमान में केवल पड़ोसी गांवों पर केंद्रित है। लेकिन अगर अधिक लोग एक साथ गरीबों को शिक्षित करने का काम करें तो मुहिम को और मजबूती मिलेगी”

महानायक उत्तम टेरोन की सोच है, “मैं खुश हूँ कि परीजात अकादमी शिक्षा के बारे में जागरूकता पैदा कर रही है। मेरे लिए निरक्षरता उन्मूलन और हर वंचित बच्चे के लिए शिक्षा अवसर कराने की तुलना में कुछ भी अधिक संतुष्टिदायक नहीं है; यह बाल श्रम भी कम करता है। शिक्षा एक जन्मसिद्ध अधिकार है। यह एक व्यक्ति का जीवन बदल सकता है, यह एक गांव बदल सकता है।”

भारत में व्याप्त अशिक्षा इसके समग्र विकास में आज भी अवरोध का कारण बना हुआ है। उत्तम टेरोन जैसे नायकों का यह प्रयास न सिर्फ सुदूरवर्ती क्षेत्रों में शिक्षा फैलाने के लिए एक प्रेरणा है बल्कि शहरी गरीबी में फैले अशिक्षा उन्मूलन के लिए एक सार्थक कदम होगा। शिक्षित युवकों का इस प्रकार का उपक्रम देश के लिए स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करेगा।


आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *