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उधार के कंप्यूटर से शुरू किया बिज़नेस, आइडिया बेहतरीन निकला, चार वर्षों में ही बन गए करोड़पति

सपने देखने वाले ही उसे हासिल करते हैं और वो सपने सच नहीं होते जो सोते वक्त देखें जाते हैं बल्कि सपने वो सच होते जिनके लिए आप सोना छोड़ देते हैं। यह जानते हुए कि कोई भी नई शुरुआत विफल हो सकती है, ऐसे में एक स्थापित नौकरी का त्याग करना बड़ी ही हिम्मत का काम होता है। यद्यपि, तार्किकता और भावनाओं का संतुलन किसी व्यक्ति के निर्णय को संचालित करता है। सुसंगत मिजाज और मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्रभामण्डल वाले व्यक्तियों से विरले ही मुलाकात हो पाती है। ऐसे ही प्रभावशाली व्यक्तित्व के मालिक हैं पंकज मालू

कोलकाता के उद्यमी पंकज मालू शुरुआत से ही यह सब समझते थे। आँखों में एक दूरदर्शिता लिए हमेशा सितारों पर अपना लक्ष्य रखा। 2 जून 1978 को एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे पंकज के पिता एक भवन-निर्माण व्यवसाय में थे। कुछ ऐसी प्रेरणा थी जो उन्हें हमेशा स्वरोजगार की ओर आकर्षित करती थी। पर उनके पास उतनी पूँजी नहीं थी कि वो अपना कारोबार स्थापित करने के लिए निवेश कर सकें। उनके पास सिर्फ एक बड़ा सपना था। उन्हें खुद में साबित करना था कि वे इतने क्षमतावान हैं कि अपनी सोच को धरातल पर ला सकते हैं।

1996 में उन्होंने श्री जैन विद्यालय से अपनी स्कूलिंग पूरी कर, भवानीपुर एज्युकेशनल सोसायटी से 1999 में वाणिज्य से स्नातक की शिक्षा पूरी की। 1995 में जब वे स्कूल में थे तभी उन्होंने एक चार्टर्ड एकाउंटेंशी (CA) फर्म से जुड़ कर काम करना शुरू कर दिया। यहाँ उन्हें 300 रूपये की तनख्वाह मिलती थी जो उनके उस वक्त के खर्च के लिए काफी था। वे अपने स्कूल और काम के बीच में संतुलन बनाने का प्रयास करते रहते थे। उनमें हर दिन कुछ नया सीखने की ललक थी। अपने चिरंजीवी उत्साह से उन्हें एहसास था कि कुछ महत्वपूर्ण है जो उनकी राह देख रही है। अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए उन्हें अपने अथक प्रयासों और कठिन मेहनत पर भरोसा था।

2002 में उन्होंने CA की अहर्ता प्राप्त की और एक निजी संस्था में नौकरी करने लगे। इसी वर्ष उनका विवाह एक कुशल गृहिणी शशि से हुआ। उस समय उनकी तनख्वाह महज 12,500 थी मगर वे यहाँ साल भर भी नहीं रह पाए।

इसके बाद 2004 में उन्होंने अपनी खुद की CA फर्म बनाई। मगर काफी जल्द ही उन्हें यह महसूस हो गया कि यह वह पेशा नहीं जो वे करना चाहते थे। उन्होंने यह काम छोड़ एक नए काम की तलाश शुरु की जो उनकी दिलचस्पी और कुशलता को और प्रखर बनाए। रिसर्च के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि किस प्रकार आधुनिक समय में डिजिटलाइजेशन विस्तारित हो रहा है और ई-कामर्स की चमक पूरे बाजार में छा रही है। उन्होंने इसे एक बेहतर अवसर के रुप में लिया और इसी क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया।

केनफ़ोलिओज़ से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि “इंटरनेट के पैठ से दुनिया सिकुड़ती जा रही है और आउटसोर्सिंग सबकी पसंद बनता जा रहा है। मुझे हमेशा से रचनात्मकता और डिजाइनिंग की ललक थी। हालांकि, मैं स्वंय डिज़ाइन नहीं बना पाता हूँ मगर मैं इस विषय को बहुत अच्छे से समझता हूँ। यह तब हुआ जब मैं अपने अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए प्रतीक चिन्ह (logo) डिज़ाइन सेवा के लिए प्रस्ताव देने का निर्णय किया। मेरा जुनून मेरा पेशा बन गया”

पंकज पहले से ही एक व्यवसाय कर रहे थे। इससे उन्हें लोगों की भावनाओं को परखने में काफी निपुणता हो गयी थी। बहरहाल, उन्होंने कभी भी तकनीकी क्षेत्र में काम नहीं किया था परंतु उनके अंदर एक अच्छी नेतृत्व क्षमता थी। 1 मार्च 2005 को उन्होंने अपने सह संस्थापक नितेश थापा के साथ मिलकर क्रिएटीव फिंगर्स नामक एक स्टार्टअप की नींव रखी। यह कोई आसान काम नहीं था। अपने पिछले काम को छोड़ना उन्हें और उनके आत्मविश्वास को झकझोर कर रख दिया। मगर एक दूसरे स्टार्टअप की शुरुआत ने उन्हें एक नई उर्जा दी।

डिजाइनिंग के व्यवसाय में जाने का अर्थ था एक पूरी तरह से नये आयाम का अन्वेषण करना और एक बड़ी प्रतियोगिता का हिस्सा बनना। हालांकि, इस क्षेत्र में अवसरों की भी कोई कमी नहीं थी और उस वक्त, 2005 में बहुत ही कम लोग इस क्षेत्र में थे। कम पैसे में गुणवत्तापूर्ण काम उपलब्ध करा वे तेजी से आगे बढ़े।

कार्यनीति की रूपरेखा तैयार थी, मगर राह में सबसे बड़ा अवरोध पूँजी का अभाव था। उनके पास व्यवसाय में लगाने के लिए कुछ ज्यादा बचत पूँजी नहीं थी। ऐसे में उनके मित्रगण आगे आए। उन सब ने अपने स्तर से उनकी मदद की जिससे की कम से कम वे इस व्यवसाय को आजमा सके।

“मेरे पहले कम्पयूटर की आपूर्ति मेरे एक मित्र ने उधार पर की थी और 8X6 फीट के कमरे वाले ऑफिस एक दूसरे मित्र ने दिया जिसका किराया उन्हें नहीं देना होता था। और इस प्रकार क्रिएटीव फिंगर्स की शुरुआत हुई”, थोड़े भावुक होते हुए उन्होंने कहा।

उन्हें पता था कि इस व्यवसाय को स्थापित करने के लिए उन्हें मदद की जरुरत होगी। इसके लिए उन्होंने साझेदार बनाया। उन्होंने खुद मार्केटिंग का दायित्व लिया और उनके साझेदार नितेश डिजाइनिंग की कमान संभाली। आहिस्ता-आहिस्ता, जैसे कारोबार बढ़ने लगा उन्होंने कर्मचारी रखना चालू कर दी। वे इस सेवा उद्योग में अनुभव के साथ बढ़ने लगे उनके फ़ेहरिस्त में ग्राहक की तादाद भी बढ़ने लगी। जल्द ही वे और भी विस्तृत क्षेत्र में फैलने लगे और अपने कामकाज को बढ़ाते हुए कई देशों से ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे।

“हमलोग सेवा उद्योग में हैं। हमलोग व्यवसायों के लिए ब्रैंडिंग और कार्पोरेट पहचान सामाधानों की सेवा प्रदान करते हैं। हमारी विशेषज्ञता लोगो डिज़ाइन, कार्पोरेट पहचान, ब्रैण्ड संसूचन, पैकेजिंग, विज्ञापन, वेबसाईट डिजाइनिंग और सोशल मिडिया जैसे इनटरनेट मार्केटिंग विकसित करने में है”, पंकज ने संक्षेप में हमें अपने व्यवसाय के बारे में बताया।

कोलकाता से बाहर अपनी एक शाखा से पंकज ने क्रिएटिव फिंगर के लिए कई प्रकार से मार्केटिंग की। ग्राहक पाने की आशा में वे रात-रात भर जागते थे। यह यात्रा तब शुरु हुई जब उन्हें 10 डॉलर में बैनर डिजाइनिंग का पहला काम मिला। जैसे-जैसे ग्राहकों को विश्वास होता चला गया कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण परिणाम वाजिब मूल्य पर मिल रहा है, वैसे-वैसे उनकी कंपनी पनपने लगी थी।

साल 2006 में उन्हें महत्वपूर्ण सफलता मिली। एक ऑस्ट्रेलियाई ग्राहक के जरिए उन्होंने अपनी सेवाओं का विस्तार किया और इससे उन्हें ग्राहकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई। 2005-06 में क्रिएटिव फिंगर्स ने 4 लाख का टर्नओवर प्राप्त किया और लगभग 100 ग्राहकों को अपने साथ जोड़ने में सफल रहे। व्यवसाय बढ़ने के बाद पंकज ने सबसे पहले 4000 के सामान्य किराए पर एक उपयुक्त कार्यालय लिया। 600 वर्गफीट के इस ऑफिस में काम करते हुए साल-दर-साल उनकी कंपनी बड़ी होती चली गई।

सबकुछ सुचारु रूप से चल रहा था मगर 2009 के मंदी के वक्त उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। इसका प्रभाव इतना तगड़ा था कि क्रिएटिव फिंगर्स की नींव तक हिल गई। मेहनत तो पूरी टीम भरपूर कर रही थी परंतु उनकी बिक्री घटती जा रही थी। मंदी में गुजारा करना कठिन था और कंपनी को इसके दीर्घकालिक प्रभाव से संभलने में 2 वर्षों का लम्बा समय लग गया।

इसके बाद, 2009 में जब व्यवसाय थोड़ा फैला तो उनके भाई प्रदीप मालू कंपनी के साथ जुड़ गये और फिर उन लोगों ने क्रिएटिव मशिनज नाम से एक नई शाखा का लोकार्पण किया जो पूरी तरह से सोशल मीडिया प्लेटफार्म के द्वारा डिजिटल मार्केटिंग पर केन्द्रित है।

क्रिएटिव मशिनज एक सीमित दायित्व वाली साझेदारी (LLP) फर्म है। क्रिएटिव फिंगर्स के साथ संयुक्त रुप से उनका टर्नओवर 4 करोड़ तक पहुँच गया। अब उन्होंने ऑफिस के लिए भोवानीपुर में 2500 वर्गफीट की अपनी जगह खरीद ली है। वर्तमान में 100 कर्मचारियों के साथ काम करनेवाली पंकज की कंपनी का 2016-17 का टर्नओवर 8 करोड़ तक पहुँच गया और 500 से अधिक मजबूत ग्राहक इसका हिस्सा हैं।

आज अपने बरकरार कारोबार से पंकज नए उद्यमियों को मार्गदर्शन करते हैं और इस बात में यकीन करते हैं कि सतत रुप से किया गया कठिन काम आपको किसी भी ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।

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