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अपनी अनोखी तकनीक के साथ लौटे भारत, सिर्फ 20 एकड़ में करते हैं 500 टन सब्जियों का उत्पादन

भारतीय प्रतिभा दुनिया भर में हरेक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। चाहे अमेरिका की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी नासा हो या फिर माइक्रोसॉफ्ट, गूगल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी, हर जगह भारतीयों की प्रतिभा देखने को मिलती। हालांकि यह सच है कि एक स्वर्णिम करियर की तलाश में कई प्रतिभाशाली भारतीयों ने विदेशों की ओर रुख किया है। लेकिन बदलते वक़्त के साथ कई भारतीय वापस स्वेदश लौट अपनी प्रतिभा का उपयोग कर न सिर्फ एक शानदार करियर बना रहे बल्कि औरों के लिए भी तरक्की का रास्ता खोल रहे। कृषि स्टार्टअप सिंपली फ्रेश के संस्थापक सचिन डबरवार और श्वेता डबरवार की कहानी कुछ ऐसी ही है।

सचिन ने लगभग 18 वर्षों तक ऑस्ट्रेलिया में एक शानदार जीवन व्यतीत किया लेकिन भारत वापस आने और अपनी मातृभूमि में कुछ करने की भावना उनके अंदर हमेशा जिंदा रही। ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान, सचिन ने विकसित देशों में खेती की जाने वाली तकनीकों का अध्ययन किया। यह एक समय था जब हाइड्रोपोनिक्स और एरोपोनिक्स जैसी आधुनिक खेती की तरक़ीब विकसित हो रही थीं। हालांकि, बड़े पैमाने पर ऐसी तकनीकों का उपयोग आसान नहीं था।

सचिन ने संयंत्र की जरूरतों को समझने की अपनी तकनीकों पर शोध किया और मौजूदा हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली को उसके अनुरूप विकसित करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिए। उनकी तकनीक में एक तरफ पौधों की प्रत्येक प्रजाति की पोषण संबंधी आवश्यकताओं का सटीक अध्ययन और बड़े पैमाने पर खेत को ठीक से नियंत्रित करने के लिए आधारभूत संरचना को स्वचालित करना शामिल था। उनका प्रारंभिक शोध सफल रहा लेकिन फिर भी सन्तुष्ट जनक परिणाम प्राप्त नहीं हुए। सचिन के लिए वास्तविकता में अपनी तकनीकों का प्रयास करना जरूरी था। उन्होंने अपने खेती के व्यवसाय को स्थापित करने का फैसला किया, लेकिन दूसरों के लिए, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के बजाय भारत में अपना खेत स्थापित करने का फैसला किया।

साल 2013 में सचिन ने अपनी कंपनी सिंपली फ्रेश की शुरुआत 10 एकड़ के छोटे से खेत से की। सचिन ने अपनी पत्नी के साथ पर्यावरणीय परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन किया और अपने खेत में उगाए जाने वाले पौधों की पोषण संबंधी आवश्यकता को परिभाषित किया। उनकी तकनीकें अपने शुरुआती दिनों से सफल थीं लेकिन व्यावसायिक स्तर पर एक समान परिणाम का निर्माण करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। सचिन ने हाइड्रोपोनिक प्रणाली के तहत पौधों को उगाने की प्रक्रिया को स्वचालित करने के लिए बहुत मेहनत की। उनकी मेहनत तब रंग लाई, जब उनके खेत में विशाल पैमाने पर एक समान गुणवत्ता का उत्पादन शुरू हो गया।

शुरुआती सफलता और अपने स्वयं के व्यवसाय मॉडल में अपने विश्वास को मजबूत करने के बाद, सचिन ने महसूस किया कि वह अन्य साझेदारों को शामिल कर इसे विस्तार रूप देंगे। उन्होंने जल्द ही निजी इक्विटी निवेशकों तक पहुंचना शुरू कर दिया और अपने संचालन के अगले चरण के लिए धन जुटाया। और तब से लेकर आज तक सचिन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सचिन नवाचार और स्केलिंग के बीच संतुलन बनाए रखे हैं। उनकी क्रांतिकारी तकनीक से सिर्फ 20 एकड़ भूमि में 500 टन उपज पैदा हो रही। कंपनी ने अपने उत्पादों को आधुनिक खुदरा और ऑनलाइन स्टोर में उपलब्ध कराने के लिए आपूर्ति श्रृंखला के एक नेटवर्क को भी तैयार किया है।

कंपनी विदेशी फूलों, सब्जियों और औषधीय पौधों का उत्पादन करती है। उनकी तकनीक के अंतर्गत एक मानव निर्मित पानी की टंकी पानी को स्टोर करती है जिसे पौधों को ठीक-ठाक पोषण प्रदान करने के साथ-साथ सही जरूरत के अनुसार सावधानीपूर्वक आपूर्ति की जाती है। कई अन्य आधुनिक खेतों के विपरीत, सिंपली फ्रेश के ग्रीनहाउस विद्युत संचालित एयरकंडीशनर या रासायनिक शीतलन तकनीक के तहत तापमान को बेहद आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। सिंपली फ्रेश के बारे में एक और दिलचस्प बात यह है कि वे उपभोक्ताओं को एक क्यूआर कोड के साथ अपने उत्पादों का पता लगाने की सुविधा देते हैं जिन्हें पैकेजिंग तक बोए जाने के बाद से उत्पाद की समय-सीमा प्राप्त करने के लिए स्कैन किया जा सकता है।

2013 में इसकी शुरुआत के बाद से, सिंपली फ्रेश भारत में प्रमुख कृषि स्टार्टअप में से एक है। उनके असाधारण काम से उन्हें भारी संख्या में उपभोक्ता मिले और कई पुरस्कार जैसे सीएमओ बेस्ट ब्रांड ऑफ़ तेलंगाना 2020 अवार्ड से भी नवाजा गया। सचिन डबरवार की कहानी केवल एक और सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि सामाजिक लाभ के साथ उद्यमशीलता का बेजोड़ उदाहरण है।

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